आंध्र प्रदेश, 28 जून 2025: आंध्र प्रदेश के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर एक हाई-टेक साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए, जिसमें व्हाट्सएप के जरिए उन्हें एक फर्जी निवेश योजना में शामिल किया गया और करीब ₹2 करोड़ की ठगी कर ली गई। यह घटना साइबर अपराधियों की बढ़ती चालाकी और शिक्षित वर्ग तक इनकी पहुंच को दर्शाती है।
घटना कैसे घटी
डॉ. एम. बैटमैनबाने मुनिस्वामी, जो कि JIPMER (जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च) के पूर्व निदेशक हैं, उन्हें 18 जून 2025 को व्हाट्सएप पर एक समूह में जोड़ा गया जिसका नाम था “H-10 Nuvama Health Group”। यह समूह प्रसिद्ध निवेश कंपनी नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट से जुड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था।
समूह में शामिल होने के बाद, “कंगना” नाम की एक महिला ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से संदेश भेजा और खुद को नुवामा की अधिकारी बताया। उसने उन्हें एक फर्जी वेबसाइट पर निवेश करने के लिए आमंत्रित किया जो असली वेबसाइट की हूबहू नकल थी।
छोटी कमाई, बड़ा नुकसान
प्रोफेसर ने पहले ₹10,000 निवेश किए और कुछ ही समय में उन्हें ₹13,000 वापस मिले। इससे उनका विश्वास बढ़ा और उन्होंने अगले कुछ हफ्तों में कुल मिलाकर ₹1.9 करोड़ का निवेश कर दिया। फर्जी वेबसाइट पर उनका “बैलेंस” ₹35 करोड़ तक दिखाया गया।
जब उन्होंने ₹5 करोड़ निकालने की कोशिश की, तो उन्हें “प्रोसेसिंग फीस” के रूप में ₹32 लाख मांगे गए, जिसे बाद में घटाकर ₹7.9 लाख कर दिया गया। फीस देने के बावजूद उन्हें कोई राशि वापस नहीं मिली।
इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने खुद को नुवामा का वरिष्ठ अधिकारी “आशीष केहैर” बताते हुए उनसे संपर्क किया, लेकिन अंततः संपर्क टूट गया और उन्हें अहसास हुआ कि वह ठगी के शिकार हो चुके हैं।
कानूनी कार्रवाई
डॉ. मुनिस्वामी ने CBI में शिकायत दर्ज कराई है। साइबर अपराध शाखा इस मामले की जांच कर रही है और माना जा रहा है कि यह एक संगठित साइबर गिरोह द्वारा किया गया धोखाधड़ी का मामला है।
ठगी के पीछे की रणनीति
- ब्रांड का भरोसा: पीड़ित पहले से ही नुवामा में निवेश कर चुके थे, जिससे फर्जी समूह और वेबसाइट असली लगे।
- यथार्थवादी रिटर्न: शुरूआत में छोटे लाभ दिखाकर भरोसा जीता गया।
- प्रोफेशनल वेबसाइट: नकली वेबसाइट पर बैलेंस और निवेश की जानकारी बहुत प्रोफेशनल ढंग से दी गई।
- सोशल इंजीनियरिंग: बातचीत में प्रोफेशनल भाषा और झूठे पदों का उपयोग कर विश्वास स्थापित किया गया।
डिजिटल निवेश घोटालों का बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के महीनों में व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर निवेश घोटाले तेजी से बढ़े हैं। इन स्कीमों में तुरंत भारी रिटर्न का लालच देकर लोगों को झांसे में लिया जाता है।
कैसे रहें सतर्क
- ग्रुप की वैधता जांचें: बिना अनुमति के कोई भी वित्तीय संस्था आपको व्हाट्सएप ग्रुप में नहीं जोड़ती।
- व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें: बैंक डिटेल, PAN या OTP जैसे संवेदनशील डेटा शेयर न करें।
- झटपट मुनाफे से सावधान रहें: ज्यादा रिटर्न देने वाले ऑफर अक्सर फर्जी होते हैं।
- सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट/ऐप का उपयोग करें: निवेश करने के लिए केवल विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करें।
- ठगी का शक हो तो तुरंत रिपोर्ट करें: cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
निष्कर्ष
यह घटना बताती है कि साइबर ठग अब और भी चालाक हो गए हैं और शिक्षित एवं अनुभवी व्यक्तियों को भी आसानी से निशाना बना सकते हैं। हर निवेश से पहले सतर्क रहना, जानकारी की पुष्टि करना और सोच-समझकर कदम उठाना अत्यंत जरूरी है।