बुलढाणा ZP स्कूल स्वच्छता विवाद – शिक्षा मंत्री की यात्रा से पहले बच्चों से करवाया गया झाड़ू और पानी ढोने का काम

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के सिणगांव जहागिर गांव की एक जिला परिषद प्राथमिक शाला में शिक्षा मंत्री दादा भुसे की प्रस्तावित यात्रा से पहले छात्रों से झाड़ू लगवाना, पानी के क्रेट्स उठवाना और सफाई करवाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिससे राज्यभर में विवाद खड़ा हो गया है।

शैक्षणिक वर्ष के पहले ही दिन बच्चों से सफाई जैसा श्रम करवाया जाना शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। कई संगठनों और नागरिकों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

शिक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश

शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने कहा, “यदि यह घटना सही है तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। मैंने जांच के आदेश दे दिए हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

शिक्षक संघ का विरोध

महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। समिति का कहना है कि, “स्कूल की सफाई की जिम्मेदारी सरकार की है, न कि छात्रों की। बच्चों से जबरन सफाई करवाना उनके बाल अधिकारों का उल्लंघन है।”

संघ ने सरकार से मांग की है कि हर स्कूल में स्थायी सफाई कर्मचारी की नियुक्ति की जाए और सफाई के लिए विशेष निधि उपलब्ध कराई जाए।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे गुट) की नेता जयश्री शेलार ने भी इस मामले की निंदा की। उन्होंने कहा, “बच्चों से झाड़ू लगवाना और पानी उठवाना शिक्षा व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।”

प्रशासनिक लापरवाही और संसाधनों की कमी

यह घटना ग्रामीण स्कूलों में सफाई कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक ढांचे की कमजोरी को उजागर करती है। कई स्कूलों में सफाई का कार्य शिक्षकों या छात्रों को ही करना पड़ता है।

निष्कर्ष

विद्यालय बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र है, जहां उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए। छात्रों से सफाई करवाना न केवल गलत है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

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