Prada Criticized over Didn Gave Credit for Kolhapuri Chappals — एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने लग्जरी फैशन ब्रांड प्राडा पर कोल्हापुरी शैली की चप्पलें ₹1.2 लाख की भारी कीमत पर बेचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि ब्रांड ने न तो इन पारंपरिक चप्पलों को बनाने वाले कारीगरों को श्रेय दिया और न ही जीआई (भौगोलिक संकेतक) टैग का उपयोग किया।
ये चप्पलें प्राडा के “मेन स्प्रिंग/समर 2026” कलेक्शन में मिलान फैशन वीक के दौरान प्रदर्शित की गई थीं। इनका डिज़ाइन पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों से काफी मिलता-जुलता है, जो आमतौर पर ₹500 से ₹1500 तक में उपलब्ध होती हैं।
सोशल मीडिया पर रोहित पवार ने प्राडा को “चप्पलचोर” करार देते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह न केवल अनैतिक है बल्कि भारत के बौद्धिक संपदा अधिकारों और जीआई टैग कानूनों का उल्लंघन भी है।
“हमारे कारीगर वर्षों से कोल्हापुरी चप्पलों की परंपरा को जीवित रखे हुए हैं। एक अंतरराष्ट्रीय ब्रांड द्वारा उनके डिज़ाइन को इतना महंगा बेचकर श्रेय न देना पूरी तरह अनुचित है,” — रोहित पवार (एक्स पोस्ट में)
पवार ने महाराष्ट्र सरकार से इस मामले की जांच करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक चोरी और भारतीय विरासत के दोहन का मामला बताया।
इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। कई यूजर्स ने प्राडा पर ‘कल्चरल थेफ्ट’ का आरोप लगाते हुए पारंपरिक भारतीय कारीगरों को पहचान और सम्मान देने की मांग की है।
कोल्हापुरी चप्पलें क्यों हैं खास?
कोल्हापुरी चप्पलें अपनी मजबूती, शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी जाती हैं। इन्हें 2019 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था, जो यह सुनिश्चित करता है कि केवल महाराष्ट्र और कर्नाटक के विशेष क्षेत्रों में बनी चप्पलें ही “कोल्हापुरी” नाम से बेची जा सकती हैं।
आगे क्या?
- राज्य सरकार इस मुद्दे की जांच कर सकती है और आवश्यक कार्रवाई कर सकती है।
- प्राडा से उम्मीद की जा रही है कि वह डिजाइन का स्रोत स्वीकार करे और भारतीय कारीगरों के साथ साझेदारी करे।
- यह प्रकरण वैश्विक फैशन उद्योग में नैतिकता और सांस्कृतिक श्रेय देने के महत्व को उजागर करता है।
यह घटना याद दिलाती है कि वैश्विक ब्रांडों को सांस्कृतिक धरोहर और कानूनी अधिकारों का सम्मान करते हुए ज़िम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए।